बरसात के बाद खल जल्दी क्यों खराब होती है
मानसून के बाद हवा में नमी बहुत अधिक रहती है। खल एक सूखा और सोखने वाला पदार्थ है — यह हवा से नमी खींच लेती है। जैसे ही खल में नमी की मात्रा बढ़ती है, फफूंद (fungus) पनपने लगती है। यही कारण है कि सितंबर-अक्टूबर में खरीदी गई खल अगर ठीक से न रखी जाए तो दो-तीन हफ्ते में ही गंध देने लगती है। समस्या खल की गुणवत्ता की नहीं, भंडारण की होती है।
बोरियाँ कहाँ और कैसे रखें
बोरियों को कभी सीधे फर्श पर न रखें। लकड़ी के पटरे, ईंट या पैलेट पर 4-6 इंच ऊँचाई पर रखें ताकि नीचे से हवा निकलती रहे। दीवार से भी कम से कम एक फुट की दूरी रखें — दीवारें बरसात में नमी छोड़ती हैं। कमरे में रोशनदान या खिड़की खुली रखें ताकि हवा का आना-जाना बना रहे। बंद और सीलन भरे कमरे में खल सबसे जल्दी खराब होती है।
फफूंद की पहचान समय रहते करें
हर बार बोरी खोलते समय तीन बातें जाँचें — गंध, रंग और गुठलियाँ। ताज़ी खल की गंध हल्की और मीठी होती है; खट्टी, बासी या मिट्टी जैसी गंध पहला संकेत है। सफेद, हरी या काली परत दिखना फफूंद है। अगर खल हाथ में दबाने पर गुठली बन जाए और भुरभुरी न रहे, तो उसमें नमी आ चुकी है। ऊपर की परत ठीक दिखे तब भी बोरी के बीच से निकालकर जाँचें।
नमी के मौसम में कितनी खरीदें
गर्मियों में किसान अक्सर एक-दो महीने का स्टॉक रख लेते हैं, लेकिन बरसात के बाद यह सही नहीं रहता। नमी वाले महीनों में उतनी ही खल खरीदें जितनी दो से तीन हफ्ते में इस्तेमाल हो जाए। थोड़ा-थोड़ा और बार-बार खरीदना इस मौसम में सस्ता पड़ता है, क्योंकि खराब हुई खल का नुकसान बचत से कहीं ज़्यादा होता है। पुरानी बोरी पहले खत्म करें, नई बाद में खोलें।
फफूंद लगी खल पशु को न खिलाएं
यह सबसे ज़रूरी बात है। फफूंद लगी खल में ऐसे विषैले तत्व बन सकते हैं जो पशु के लिवर और पाचन को नुकसान पहुँचाते हैं, और दूध उत्पादन घटा सकते हैं। थोड़ी सी फफूंद हो तो भी उसे झाड़कर या धूप में सुखाकर खिलाने की कोशिश न करें। संदेह हो तो वह हिस्सा अलग कर दें और अपने पशु चिकित्सक से सलाह लें। दो Bhai से खरीदी गई किसी भी बोरी में समस्या लगे तो हमें बताएं।
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