दूध उत्पादन और गुणवत्ता में वृद्धि
बिनौला खल में 20-24% प्रोटीन होता है जो दूध उत्पादन बढ़ाने में सहायक है। शोध से पता चला है कि नियमित रूप से बिनौला खल खिलाने से दूध की मात्रा में 15-20% तक की वृद्धि हो सकती है। साथ ही इसमें मौजूद फैट दूध में वसा (फैट) प्रतिशत को भी सुधारता है, जिससे दूध का भाव बढ़ता है।
पशु स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता
बिनौला खल में विटामिन ई, फॉस्फोरस और आवश्यक फैटी एसिड (ओमेगा-3 और ओमेगा-6) होते हैं जो पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। यह गर्भधारण के बाद पशुओं को जल्दी स्वस्थ होने में मदद करता है और प्रजनन क्षमता में सुधार करता है। नियमित सेवन से केटोसिस और मिल्क फीवर जैसी चयापचय बीमारियों का खतरा कम होता है।
पाचन तंत्र के लिए लाभकारी
बिनौला खल में अच्छी मात्रा में फाइबर होता है जो पशुओं के पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह रूमेन (पशु के पहले पेट) में अच्छे बैक्टीरिया के विकास में मदद करता है, जिससे चारे का पाचन बेहतर होता है और पोषक तत्वों का अवशोषण बढ़ता है। इससे पशु को खाने से अधिक ऊर्जा मिलती है।
वजन और शारीरिक विकास
बिनौला खल में उच्च प्रोटीन और ऊर्जा होने के कारण यह पशुओं के वजन और शारीरिक विकास में सहायक है। यह विशेष रूप से युवा पशुओं (बछड़ों) के विकास के लिए फायदेमंद है। साथ ही दूध देने वाले पशुओं में शरीर की चर्बी बनाए रखने में मदद करता है ताकि वे दूध उत्पादन के दौरान कमजोर न हों।
Source: ExportersIndia / Simran Industries — यह लेख मूल स्रोत से अनुकूलित किया गया है। पूरा लेख पढ़ने के लिए ऊपर दिए गए लिंक पर जाएं।
