ठंड में पशुओं को अतिरिक्त ऊर्जा की ज़रूरत
सर्दियों में तापमान गिरने पर पशु अपने शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए अधिक ऊर्जा खर्च करते हैं। इस दौरान उन्हें सामान्य से 10-15% अधिक ऊर्जा वाला आहार देना चाहिए। बिनौला खल इसमें बहुत मददगार है क्योंकि इसमें प्रोटीन और फैट दोनों होते हैं जो शरीर को गर्म रखने में सहायक हैं। रोजाना की मात्रा 0.5-1 किलो बढ़ा सकते हैं।
चारे का प्रबंधन
सर्दियों में हरा चारा कम मिलता है इसलिए पहले से तैयारी करें। साइलेज, हे और स्ट्रॉ का उपयोग करें। बिनौला खल जैसे दानेदार आहार को हरे चारे के साथ मिलाकर दें ताकि पशु को पर्याप्त पोषण मिले। ध्यान रखें कि चारा साफ और सूखा हो। फफूंद लगा चारा पशुओं को बीमार कर सकता है।
पानी का प्रबंधन
सर्दियों में अक्सर पशुपालक पानी की कम देखभाल करते हैं जबकि ठंड में भी पशुओं को पर्याप्त पानी चाहिए। पानी जम सकता है इसलिए दिन में 2-3 बार ताजा पानी दें। गुनगुना पानी देने से पशु ज्यादा पीते हैं और उनका पाचन भी बेहतर रहता है। पानी की कमी से चारा खपत और दूध उत्पादन दोनों प्रभावित होते हैं।
बछड़ों की विशेष देखभाल
नवजात बछड़ों को सर्दियों में अतिरिक्त देखभाल की ज़रूरत होती है। उन्हें ड्राफ्ट (हवा के झोंके) से बचाकर रखें। सूखा और साफ बिस्तर दें। पहले 24 घंटे में पर्याप्त कोलोस्ट्रम (खीस) पिलाएं। यदि तापमान बहुत कम है तो बछड़ों के लिए हीट लैंप या गर्म कपड़े का प्रबंध करें। बिनौला खल बछड़ों को 6 महीने की उम्र के बाद ही देना शुरू करें।
बीमारियों से बचाव
सर्दियों में निमोनिया और पाचन संबंधी बीमारियाँ आम हैं। पशुओं को सूखी और साफ जगह पर रखें। टीकाकरण समय पर करवाएं। पशुओं की नियमित जांच करें — अगर कोई पशु सुस्त है या कम खा रहा है, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। दो Bhai की बिनौला खल पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करती है।
